कैला देवी मंदिर करौली – कहाँ है, कैसे पहुँचें, मेला व दर्शन समय
राजस्थान के करौली जिले में अरावली की पहाड़ियों के बीच बसा कैला देवी मंदिर, एक ऐसा ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल है जहाँ हर साल लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब उमड़ता है। माता कैला देवी, जिन्हें महालक्ष्मी एवं महायोगिनी माया का रूप माना जाता है, अपने चमत्कारों और भक्तों की चिंताओं का समाधान करने के लिए प्रसिद्ध हैं। इस मंदिर की अपनी एक खास पहचान है, चाहे उसका झुकी हुई मूर्ति हो या चैत्र मास में लगे भव्य मेले, जो इसे राजस्थान के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल करता है।
मंदिर कहाँ है?
यह मंदिर कैलादेवी गाँव, करौली जिले में स्थित है—करौली शहर से लगभग 23‑26 किमी दक्षिण में।
अरावली की त्रिकूट पहाड़ियों के बीच, कालिसिल नदी के किनारे स्थित यह स्थान प्रकृति और आस्था का अद्भुत संगम है।
इतिहास और पौराणिक कथा
कैला देवी को महालक्ष्मी और महायोगिनी दुर्गा का अवतार माना जाता है। कहा जाता है कि स्कंद पुराण में इस बात का जिक्र है कि कलियुग में माता ‘कैला’ के नाम से जानी जाएंगी।
एक कहानी यह भी है कि एक साधु माता की मूर्ति को नागरकोट से ला रहे थे। रास्ते में बैल वहीं रुक गया और फिर माता ने संकेत दिया कि यही उनका स्थान है। इसके बाद वहाँ मंदिर बनवाया गया।
मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में करौली रियासत के राजा गोपाल सिंह जी ने करवाया था। तब से लेकर आज तक यह मंदिर लाखों लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है।
मंदिर की संरचना
मंदिर संगमरमर और लाल पत्थरों से बना है। गर्भगृह में माता की जो मूर्ति है, वह थोड़ी सी झुकी हुई है। माना जाता है कि एक भक्त को दर्शन नहीं हो पा रहे थे, तो माता उसी की ओर मुड़ गईं और मूर्ति हमेशा के लिए झुक गई।
मंदिर के प्रांगण में छोटी चामुंडा देवी, भैरव बाबा, गणेश जी और खासतौर पर ‘लांगुरिया’ हनुमान जी के छोटे मंदिर भी हैं।
मेला और उत्सव
अगर आप मार्च–अप्रैल में यहाँ जाते हैं, तो आपको कैला देवी का मेला ज़रूर देखना चाहिए। इस दौरान लाखों श्रद्धालु यहाँ आते हैं, कई तो पैदल चलकर। मेला लगभग 15 दिनों तक चलता है। लोग माता को हरी चूड़ियाँ, सिंदूर और मिठाई अर्पित करते हैं।
मंदिर के आसपास उस समय लोकगीत, लांगुरिया नाच, ढोल-नगाड़ों की आवाज़ और भक्तों की भीड़ होती है – एकदम अलग ही माहौल होता है। हर साल चैत्र मास (मार्च–अप्रैल) में दो सप्ताह तक चलने वाला “लक्खी मेला” यहाँ लगता है। इस मेले में हर साल करीब 30–40 लाख श्रद्धालु भाग लेते हैं।
कैसे पहुंचें?
सड़क मार्ग:
करौली, गंगापुर सिटी और हिंडौन सिटी से बस या टैक्सी के ज़रिए मंदिर तक पहुँचा जा सकता है। जयपुर से दूरी लगभग 170 किमी है।
रेल मार्ग:
सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन है गंगापुर सिटी (करीब 34 किमी दूर)। अन्य नज़दीकी स्टेशन हैं: हिंडौन सिटी और श्री महावीर जी।
हवाई मार्ग:
सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जो मंदिर से करीब 170 किमी दूर है।
दर्शन समय और मौसम
मंदिर हर दिन सुबह 4 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है।
गर्मियों में तापमान 47°C तक पहुँच सकता है जबकि सर्दियों में यह 12°C तक गिर जाता है।
सितंबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
आसपास की जगहें
- कैला देवी वाइल्डलाइफ सेंचुरी – जंगल और वन्यजीव देखने लायक।
- तिमनगढ़ किला – इतिहास प्रेमियों के लिए।
- मदन मोहन मंदिर, गधमोरा गाँव, हिंडौन सिटी – आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल।
रोचक तथ्य
- कहा जाता है कि मंदिर की मूर्ति थोड़ी झुकी हुई है क्योंकि एक भक्त को दर्शन न मिल पाने पर माता स्वयं उसकी दिशा में झुक गई थीं।
- यह मंदिर एक शक्तिपीठ के रूप में भी प्रसिद्ध है और कई लोगों की कुलदेवी के रूप में पूजी जाती है।
निष्कर्ष
कैला देवी मंदिर एक ऐसी जगह है जहाँ आस्था, इतिहास और प्रकृति साथ-साथ चलते हैं। अगर आप राजस्थान की सांस्कृतिक, धार्मिक और प्राकृतिक सुंदरता को एक साथ महसूस करना चाहते हैं, तो यह स्थान ज़रूर आपकी यात्रा सूची में होना चाहिए।
FAQs (Frequently Asked Questions)
प्रश्न: कैला देवी किसकी कुलदेवी हैं?
उत्तर: यह मंदिर करौली रियासत के यदुवंशी (जादौन) राजाओं की कुलदेवी का स्थान है।
प्रश्न: कैला देवी मंदिर कहाँ स्थित है?
उत्तर: यह करौली से लगभग 23–26 किमी दूर, कैलादेवी गाँव में स्थित है।
प्रश्न: कैला देवी मंदिर कब खुलता है?
उत्तर: हर दिन सुबह 4 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है।
प्रश्न: कैला देवी का मेला कब लगता है?
उत्तर: चैत्र मास (मार्च–अप्रैल) में हर साल करीब 2 हफ्ते तक।
प्रश्न: नजदीकी रेलवे स्टेशन कौन सा है?
उत्तर: गंगापुर सिटी स्टेशन, जो मंदिर से लगभग 34 किमी दूर है।